EV खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! दिल्ली में सब्सिडी अब ₹80,000 तक मिलेगी

Delhi EV Policy 2.0 : दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ रहा है और अब राजधानी में नई ईवी पॉलिसी 2.0 लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इस नई नीति को केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे खरीदारों को सीधा और ज्यादा फायदा मिल सके। सरकार का मकसद साफ है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ें और प्रदूषण में ठोस कमी दिखाई दे। नई योजना के तहत चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जाएगा, सब्सिडी की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी और 2028 तक हजारों इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने का रोडमैप तैयार किया गया है, जिससे राजधानी की तस्वीर बदलती हुई नजर आ सकती है।

केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बड़ा बजट तय किया गया है। करीब 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है ताकि राज्यों में सार्वजनिक परिवहन को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक में बदला जा सके। इसके साथ ही देशभर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है, जिससे सार्वजनिक और निजी दोनों स्तर पर चार्जिंग स्टेशनों का जाल फैलाया जा सके। इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टेस्टिंग एजेंसियों के अपग्रेडेशन और मॉडरेशन पर 780 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है ताकि बैटरी, उपकरण और वाहन तय मानकों पर खरे उतरें और ग्राहकों को भरोसेमंद विकल्प मिल सके।

राजधानी में चार्जिंग की दिक्कत दूर करने के लिए 47 किलोमीटर लंबे आउटर रिंग रोड पर हर पांच किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन लगाने की तैयारी है, जिससे लंबी दूरी तय करने वालों की रेंज को लेकर चिंता कम होगी। अभी दिल्ली में 8,998 चार्जिंग पॉइंट मौजूद हैं जबकि जरूरत 36,177 की बताई जा रही है और साल के अंत तक इसे बढ़ाकर 16,070 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सब्सिडी की बात करें तो दोपहिया और तिपहिया खरीदारों के लिए यह किसी बड़े मौके से कम नहीं है। केंद्र जहां दोपहिया पर 10,000 रुपये तक की छूट दे रहा है वहीं दिल्ली सरकार 30,000 रुपये तक की सब्सिडी दे सकती है। एल5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक तिपहिया पर केंद्र से 50,000 रुपये और राज्य से 30,000 रुपये तक की राहत मिल सकती है, जिससे कुल लाभ 80,000 रुपये तक पहुंच सकता है। आधार के जरिए शोरूम पर तुरंत वेरिफिकेशन होगा और बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, हालांकि एक्स-फैक्टरी कीमत और रजिस्ट्रेशन जैसी शर्तें लागू रहेंगी।

नई नीति का एक बड़ा लक्ष्य दिल्ली की बस सेवा को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाना है। तय योजना के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक 6,000 ई-बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी और अगले चरण में संख्या बढ़ाकर 7,500 की जाएगी। 31 मार्च 2028 तक 10,400 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य रखा गया है और आगे चलकर इसे 14,000 तक पहुंचाने की तैयारी है। इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में शून्य टेलपाइप उत्सर्जन देती हैं जिससे हवा साफ रखने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही लंबे समय में ईंधन और मेंटेनेंस लागत कम होने की उम्मीद है, शोर कम होगा और ऊर्जा दक्षता बेहतर रहेगी, जिससे शहर को आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

ईवी पॉलिसी 2.0 सिर्फ नए वाहन बेचने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम को टिकाऊ बनाने पर जोर देती है। पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि लोग पुराने वाहन छोड़कर नए ईवी अपनाने के लिए प्रेरित हों। बैटरियों के सुरक्षित निपटान और रीसाइक्लिंग के लिए अलग तंत्र विकसित करने की योजना है और सेकेंड लाइफ उपयोग जैसे ऊर्जा भंडारण में दोबारा इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल सकता है। अगर तय लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं तो दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटने से आर्थिक स्तर पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जिससे राजधानी दूसरे शहरों के लिए एक मिसाल बन सकती है।

Leave a Comment