Skoda Kylaq का CNG मॉडल तैयार हो रहा है? EV प्लान अभी भी साफ नहीं

Skoda Kylaq CNG under evaluation : भारत में जहां ज़्यादातर बड़ी कार कंपनियां इलेक्ट्रिक सेगमेंट में उतर चुकी हैं, वहीं Skoda अभी भी केवल पेट्रोल मॉडल्स के साथ अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। कंपनी की मौजूदा लाइन-अप पूरी तरह पेट्रोल इंजन पर आधारित है, लेकिन बदलते ऑटोमोबाइल बाजार और 2027 में लागू होने वाले कड़े CAFE III उत्सर्जन नियमों को देखते हुए अब Skoda भी नए फ्यूल ऑप्शन पर गंभीरता से विचार कर रही है। कंपनी मानती है कि अगर भारत में लंबे समय तक मजबूत पकड़ बनाए रखनी है तो सिर्फ पेट्रोल पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा, बल्कि ग्राहकों को वैकल्पिक ईंधन विकल्प भी देने होंगे।

Skoda Auto के सेल्स और मार्केटिंग बोर्ड सदस्य Martin Jahn ने हाल ही में संकेत दिया कि भारत के लिए CNG विकल्प पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है। कंपनी Skoda Kylaq के लिए नए CNG पावरट्रेन का मूल्यांकन कर रही है और अगर मांग मजबूत रही तो यही तकनीक Kushaq और Slavia जैसे मॉडलों में भी दी जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि Kushaq की झलक दिखाने वाले Vision X कॉन्सेप्ट में पहले ही CNG-हाइब्रिड सेटअप दिखाया गया था, जिससे साफ है कि प्लेटफॉर्म तकनीकी रूप से इस फ्यूल को सपोर्ट कर सकता है। ऐसे में Kylaq CNG वर्जन आने की संभावना पहले से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है।

Kylaq Skoda इंडिया की बिक्री का बड़ा आधार बन चुका है। साल 2025 में कंपनी की कुल बिक्री का आधे से ज्यादा हिस्सा इसी कॉम्पैक्ट SUV से आया और इसी मॉडल की वजह से ब्रांड ने पिछले साल की तुलना में अपनी सेल्स लगभग दोगुनी की। कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में CNG की मांग भी काफी ज्यादा है और कई प्रतिद्वंद्वी पहले से ही यह विकल्प दे रहे हैं। ऐसे में अगर Kylaq CNG लॉन्च होती है तो यह सीधे उन ग्राहकों को टारगेट करेगी जो बेहतर माइलेज और कम ईंधन खर्च की तलाश में हैं। बाजार के ट्रेंड को देखते हुए CNG वेरिएंट कंपनी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

जहां तक इलेक्ट्रिक वाहनों की बात है, Skoda की रणनीति अभी भी साफ नहीं है। कंपनी कई सालों से Enyaq EV को भारत लाने की संभावना पर विचार करती रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया। छोटे Elroq मॉडल पर भी चर्चा हुई थी, पर कंपनी ने अभी तक किसी आधिकारिक लॉन्च योजना की पुष्टि नहीं की है। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक ट्रेंड अलग-अलग दिशाओं में बढ़ रहा है चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है, अमेरिका की नीति में बदलाव देखने को मिला है और यूरोप में रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। ऐसे माहौल में Skoda भारत के लिए सही समय और सही मॉडल का इंतजार कर रही है।

CAFE III नियमों की डेडलाइन नजदीक आने के साथ दबाव बढ़ता जा रहा है। अगर कंपनियां साफ और कम उत्सर्जन वाले पावरट्रेन नहीं लातीं तो भारी पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। Skoda वैश्विक स्तर पर माइल्ड हाइब्रिड, फुल हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और फुल इलेक्ट्रिक मॉडल्स विकसित कर रही है, लेकिन भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाजार में हर तकनीक को लागत के हिसाब से परखना जरूरी है। कंपनी भारत और यूरोप के बीच संभावित फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट पर भी नजर रखे हुए है, क्योंकि इससे आयात और कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि Skoda भारत में अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है और आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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